रिपोर्ट:- रवि शंकर शर्मा!

कृषि कानूनों को रद्द करने की माँग पर अड़े किसानों द्वारा गणतन्त्र दिवस पर पूर्वघोषित कार्यक्रम के तहत ट्रैक्टर रैली निकालने की तैयारी पूरी कर ली गई है। 

सरकार और किसान नेताओं के बीच कई बार की बैठक में भी बेनतीजा रही। सरकार कृषि कानूनों में संशोधन को भी तैयार है, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक निजी न्यूज़ चैनल को दिये साक्षात्कार में कहा कि वे सरकार ने किसानों को कृषि कानूनों में संशोधन हेतु आपत्ति दर्ज करने का आग्रह किया है, साथ ही इस कानून को अगले डेढ़ साल तक के लिये होल्ड करने का भी सुझाव दिया है , कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि इसका कोई सकारात्मक हल आने वाले दिनों में निकल जायेगा।

बाबजूद इसके किसान संगठन सरकार के सभी प्रस्तावों को खारिज करते हुए तीनों कृषि कानूनों को रदद् करने की जिद पर अड़े हुये हैं।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसानों द्वारा ट्रैक्टर रैली निकाले जाने की घोषणा पहले ही कि जा चुकी थी ।

इस रैली को शांतिपूर्ण प्रतिरोध मार्च के रूप में देखा जा रहा है।

आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब किसानों द्वारा गणतन्त्र दिवस के अवसर पर प्रतिरोध मार्च किया जायेगा।

किसान संगठनों ने सरकार के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता भी खारिज कर दी, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा गठित कमिटी को मानने से इनकार कर दिया।

और इसलिये पूर्वघोषित ट्रैक्टर रैली की तैयारी पूरी कर ली गई है।

ऐसा पहली बार होगा जब देश मे राजपथ पर एक तरफ परेड हो रहा होगा तो दूसरी तरफ दिल्ली और उसके आसपास के अन्य ईलाकों में किसान तिरंगे के साथ ट्रैक्टर परेड कर रहे होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 

 पंजाब के लुधियाना जिले के एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "हम मोदी को ऐसा सबक सिखाएंगे जो वे कभी नहीं भूल पाएंगे।"  और इस उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्ग 44 का चयन करते हुये किसानों ने ट्रैक्टरों में तिरंगा बाँधकर तैयार कर रखा है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने सबसे अड़ियल रुख कायम कर रखा है।

अब यह तय कर पाना मुश्किल है कि किसान नेता कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं या प्रधानमंत्री का ।


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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