किशोर कुमार ब्यूरो रिपोर्ट

मधुबनी-स्वास्थ्य विभाग 18 वर्ष से ऊपर के सभी व्यस्कों के टीकाकरण को लेकर प्रयासरत है.इसी संदर्भ में सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से टीकाकरण अभियान चलाया गया. सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार गर्भवती महिलाओं को भी टीकाकरण कराने का निर्देश दिया गया है. इसी क्रम में सोमवार को जिले के दोमंठा  निवासी गर्भवती महिला सविता प्रकाश ने कोविड-19 का टीका लिया. उन्होंने बताया मैंने प्रथम डोज ले लिया था. दूसरे डोज के वक्त में गर्भवती हो गई. ऐसे में मैं असमंजस की स्थिति में थी कि क्या कोरोना वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षित होगी. टीके की दूसरी डोज लेने में डर महसूस हो रहा था.आसपास के लोगों से बातें सुनने को मिल रही थी कि गर्भवती महिला को टीके नहीं लेनी चाहिए। गर्भवती महिला के लिए खतरनाक हो सकता है, ऐसी बात सुनकर मैं घबरा गई. डर था कहीं टीका मुझे तथा बच्चे के लिए या नुकसानदेह नहीं हो जाए लेकिन जब मुझे अखबारों के माध्यम से जानकारी मिली कि गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण बहुत ही सुरक्षित है. इस खबर को मैं पढ़ निश्चिंत हो गई और मैंने अपनी दूसरी डोज ली. टीका लेने के बाद मुझ में किसी भी तरह का कोई लक्षण प्रतीत नहीं हुआ.टीका लेने के बाद मैं तथा मेरा बच्चा दोनो  खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे है ।यह कहते हुए सविता के चेहरे पर खुशी फैल जाती है. वह अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए बताती हैं कि टीका लेकर  मैंने अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को ही नहीं पूरी की, बल्कि समाज के प्रति हमारी कुछ जिम्मेदारियां हैं जिसे मैंने पूरा किया.उन्होंने बताया टीका लेने के बाद गर्भवती महिला कोरोनावायरस संबंधी चिंता और डर से मुक्त रहेंगी. कहा, 'गर्भवती मां के टीकाकरण से मां के गर्भस्थ  बच्चे को भी बचाया जा सकता है. अगर मां के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है तो यह बच्चे में भी चली जाएगी. वैक्सीन और मां के शरीर में विकसित रोग प्रतिरोधक क्षमता का असर बच्चे में कम से कम जन्म के समय तक बना रहेगा.'

भ्रांतियों से बचने की है जरूरत:

सविता बताती हैं कि उनकी तरह समाज में आस पास बहुत से गर्भवती महिलाएं हैं जो अभी भी टीके लेने से परहेज कर रही हैं.उन्हें अभी तक सही जानकारी नहीं मिली है टीका उनके उनके तथा उनके बच्चे को कोई नुकसान नहीं करेगा और इस तरह की भ्रांतियां जब फैलती है तो हमारी जैसी महिलाएं इस संदेश का दूर करने का प्रयास नहीं करती.मैं भी  कुछ दिनों तक संशय में थी अगर  मैं अपने क्षेत्रीय कार्यकर्ता आशा/ आंगनबाड़ी से सलाह ली होती तो यह समस्या दूर हो गई होती. लेकिन अखबार के माध्यम से मुझे जानकारी मिल गई. की वैक्सीन गर्भवती महिला के लिए सुरक्षित है.आवश्यक नहीं कि समाज में सभी महिलाएं को अखबार के माध्यम से जानकारी पहुंच जाए. अगर आपको किसी प्रकार का संशय हो तो जरूर किसी स्वास्थ्य एक्सपोर्ट/ विशेषज्ञ से सलाह लें ना कि परिवार या समाज के आसपास के लोगों से यह हमारा अनुभव रहा है.

दो जिंदगियों की सुरक्षा का सवाल:

सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया कि हमारे पास भी बहुत तरह के भ्रम की जानकारी मिल रही थी. अभी भी ग्रामीण क्षेत्र में बहुत से महिलाएं टीका लेने से घबराती हैं। विभाग द्वारा निर्देश दिया गया कि क्षेत्रीय कार्यकर्ता द्वारा गर्भवती महिलाओं को लाइन लिस्टिंग कर उन्हें टीके के प्रति जागरूक किया जाए। समाज में सभी व्यक्ति तक टीके की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि सभी लोग जागरूक हो. टीका सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं यह गंभीर बीमारियों से ग्रसित व गर्भवती महिला तथा दूध पिलाने वाली माताओं के लिए भी कारगर है. विभाग द्वारा निर्देश दिया गया है कि सामुदायिक बैठक के दौरान लोगों को टीके के प्रति जागरूक किया जाए. इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। अब गर्भवती महिलाएं भी आगे बढ़कर टीके लेने के लिए केंद्रों पर आ रही हैं. उन्होंने कहा, 'दूसरी लहर के दौरान यह देखा गया कि कोविड-19 से संक्रमित गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में पहली लहर की तुलना में दो से तीन गुना वृद्धि हुई है. ऐसी स्थिति में, यह महसूस किया गया कि गर्भवती महिलाओं को भी कोविड-19 वैक्सीन का टीका लगाना चाहिए. गर्भवती महिलाओं के मामले में, दो जिंदगियों की सुरक्षा शामिल है मां और उसके गर्भस्थ शिशु। इसीलिए, स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करने का फैसला किया है.' उन्होंने कहा कि इस टीके से माताओं को अधिक लाभ होगा।


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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