किशोर कुमार ब्यूरो रिपोर्ट

मधुबनी-कमजोर बच्चों को विशेष देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य से जिले में केयर इंडिया के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग द्वारा कमजोर नवजात देखभाल कार्यक्रम का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है| 2 किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चे, 37 सप्ताह से पूर्व जन्मे बच्चे एवं जन्म से मां का दूध नहीं पी पा रहे बच्चों को कमजोर नवजात की श्रेणी में रखा जाता है| ऐसे बच्चों की सामुदायिक स्तर पर देखभाल की व्यवस्था की गयी है| कमजोर नवजात को चिह्नित कर स्वास्थ्य विभाग जन्म से 30 तक नियमित रूप से उसके स्वास्थ्य की जानकारी लेती है| आशा व एएनएम, केयर इंडिया के कर्मी द्वारा पहले सात दिन तक रोजाना बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी फोन कर ली जाती है| केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक चंदन कुमार ने बताया कमजोर नवजात शिशु को चिह्नित कर केयर इंडिया के द्वारा पहले, दूसरे, चौथे, छठे, चौदहवें एवं तीसरे दिन माता एवं परिवार को गृहभेंट या फोन कर जानकारी दी जाती है कि बच्चे को गरमाहट दी गई, गर्भनाल की देखभाल, अतिरिक्त साफ-सफाई, अतिरिक्त स्तनपान, केवल स्तनपान नवजात को नहाने से संबंधित सलाह दी जाती है। वहीं आशा कार्यकर्ता एचबीएनसी कार्यक्रम के तहत संस्थागत प्रसव की स्थिति में 6 बार (जन्म के 3, 7,14, 21, 28 एवं 42 वें दिवस पर) गृह भ्रमण करती हैं । गृह प्रसव की स्थिति में 7 बार (जन्म के 1, 3, 7,14, 21, 28 एवं 42 वें दिवस पर) गृह भ्रमण करती हैं।

केयर इंडिया के प्रखंड समन्वयक की सूझबूझ से बच सकी जान: 

झंझारपुर प्रखंड के चंदौली गांव की राधा देवी कहती हैं कि 15 नवंबर को 1950 ग्राम का प्रसव हुआ। प्रसव समय से पूर्व होने के कारण बच्चा काफी कमजोर था तथा स्तनपान भी नहीं कर पा रहा था। आशा दीदी तथा केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर चंदन कुमार ,राधा देवी घर जाकर बच्चे का वजन, कंगारु मदर केयर की विधि और स्तनपान के फायदे बताने लगे।शिशु की देखभाल को लेकर नियमित रूप से जानकारी दी गयी| बच्चे के गर्भ नाल को सूखा रखने एवं उसे नहीं नहलाने की सलाह भी दी गयी| उन्हें समझा गया कि नहाने से बच्चे में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही समय -समय पर बच्चे का वजन भी किया गया| नतीजतन पहले हफ्ते में बच्चे का वजन 250 बढ़ गया।

मातृ मृत्यु की सूचना देने पर मिलेगा एक हजार रुपये :- 

सुमन कार्यक्रम के तहत मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाती है। जबकि, मृत्यु के 24 घंटे के अंदर स्थानीय पीएचसी में सूचना देने पर आशा कार्यकर्ता को भी दो सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानी होने पर 104 टोल फ्री नंबर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। 

प्रसव के बाद छह महीने तक बीमार प्रसूति एवम उसके नवजात शिशु को मिलती है नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं  :- 

सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया सुमन कार्यक्रम के तहत प्रसव के बाद आवश्यकतानुसार बीमार प्रसूति और शिशु को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाती है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसी प्रसूति और शिशु की देखरेख करता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता महिला के घर जाकर उनके  स्वास्थ्य का हाल लेती हैं और वर्तमान स्थिति की जानकारी स्थानीय पीएचसी को देती । इसके लिए किसी भी महत्वपूर्ण मामले की आपात स्थिति के एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने की गुंजाइश के साथ रेफरल सेवाओं का आश्वासन देने का निर्देश दिया गया है। जिसमें लाभार्थी को घर से अस्पताल तक पहुंचने के लिए एम्बुलेंस की भी सुविधा शामिल है। जटिलताओं के मामले एवं सिजेरियन प्रसव पर नि: शुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जाती है।


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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