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:- के.के.मिश्रा की रिपोर्ट

बहराइच (यूपी)। राजकीय रेशम फार्म कल्पीपारा पर स्थापित नवीन धागाकरण मशीन का मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द चैहान ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर उद्घाटन किया। इस अवसर पर श्री चैहान ने मौजूद धागाकरण का कार्य करने वाली महिलाओं व अन्य उपस्थित लोगों को राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी जी की 150वीं वर्षगाॅठ की बधाई देते हुए कहा कि नवीन धागाकरण मशीन जनपद के कृषकों की आय में वृद्धि के नये मार्ग प्रशस्त करेगी। मशीन की स्थापना से जहाॅ एक ओर कृषकों के स्वतः रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे वहीं दूसरी ओर उनकी आय में 2 से 3 गुणा वृद्धि होगी।

सीडीओ श्री चैहान ने मौजूद महिलाओं को सुझाव दिया कि कोया से  धागा निकालकर समूह के रूप में एक कुटीर उद्योग की स्थापना करने से आप सभी को अधिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि रेशम धागे की अत्यधिक माॅग को देखते हुए कृषक अन्य फसलों के साथ इसे भी एक उद्योग के रूप में अपनाकर अपनी आय में गुणात्मक वृद्धि कर सकते हैं।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सहायक निदेशक रेशम एस.बी. सिंह ने बताया कि सामान्यतः चार प्रकार के रेशम-शहतूती रेशम, टसर रेशम, ऐरी रेशम व मूंगा रेशम का उत्पादन भारत वर्ष में किया जाता है। जनपद बहराइच की जलवायु की दृष्टि से मात्र शहतूती रेशम का उत्पादन एवं प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। श्री सिंह ने बताया कि जनपद में स्थापित 08 राजकीय रेशम फार्म का कुल क्षेत्रफल 136.63 एकड़ है।

सहायक निदेशक श्री सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए निर्धारित वार्षिक लक्ष्य 207985.00 कि.ग्रा. के सापेक्ष माह सितम्बर तक 64250.00 कि.ग्रा. कोया उत्पादन हुआ है। चालू वर्ष में उच्च गुणवत्तायुक्त 7.50 लाख शहतूत पौध का रोपण 328 कृषकों के यहाॅ किया गया है। इस वर्ष 5215 रेशम कोया उत्पादकों के माध्यम से कृषकों को रोज़गार उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि रेशम फार्म नगरौर में स्थापित बीजागार के द्वारा माह सितम्बर तक 4.03 लाख डी.एफ.एल्स. रेशम कीट बीज के उत्पादन द्वारा 18 जनपदों को आपूर्ति किया जा रहा है। यहाॅ की जलवायु रेशम उद्योग के लिए सर्वोत्तम होने के कारण बहराइच में शहतूती रेशम विकास की अपार संभावनाएं हैं।

डीसी एनआरएलएम सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने बताया कि रेशम कोया उत्पादन कार्यक्रमों के उपरान्त रेशम धागाकरण का कार्य सबसे महत्वपूर्ण होगा है। जिसमें रेशम कोया से धागा निकालने, धागे का लच्छी बनाना, लच्छी का बुक बनाना, पैकिंग एवं विक्रय कार्य सम्मिलित हैं। उन्होंने बताया कि नवीन मशीन में 10 बेसिन स्थापित हैं। जिसकी वार्षिक सूखा कोया खपत क्षमता 30000.00 कि.ग्रा. तथा धागा उत्पादन क्षमता 3750.00 कि.ग्रा. है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय रेशम बोर्ड भारत सरकार द्वारा संचालित योजना ‘‘कैटालिटिक डेवलपमेन्ट प्रोग्राम (सी.डी.पी.)’’ अन्तर्गत यह नवीन धागाकरण मशीन स्थापित की गयी है।

इस अवसर पर उप कृषि निदेशक डा. आर.के सिंह ने खेती के साथ शहतूत पौधरोपण कर अपनी आय में बढ़ोत्तरी करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम के अन्त में मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी ने मौजूद अन्य अधिकारियों के साथ राजकीय रेशम फार्म परिसर में शहतूत का पौधरोपण भी किया।


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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